पराशर मुनि ने अपने शिष्य बृहद्रथ से जो गोलक्षण कहा है, यहाँ पर मैं उसका संक्षेप में वर्णन करता हूँ। यद्यपि सभी गौवें शुभ लक्षण वाली होती हैं, तथापि मुनि- प्रणित शास्त्र से लेकर उनका शुभाशुभ लक्षण यहाँ कहते हैं।
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