मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 61 • श्लोक 1
पराशरः प्राह बृहद्रथाय गोलक्षणं यत् क्रियते ततोऽयम् । मया समासः शुभलक्षणास्ताः सर्वास्तथाऽप्यागमतोऽभिधास्ये ॥
पराशर मुनि ने अपने शिष्य बृहद्रथ से जो गोलक्षण कहा है, यहाँ पर मैं उसका संक्षेप में वर्णन करता हूँ। यद्यपि सभी गौवें शुभ लक्षण वाली होती हैं, तथापि मुनि- प्रणित शास्त्र से लेकर उनका शुभाशुभ लक्षण यहाँ कहते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें