पाकर, पीपल, सिरस और बढ़ के पत्तों के काढ़े से; मंगलसंज्ञक (जया, जयन्ती, जीवन्ती, जीवपुत्री, पुनर्नवा, विष्णुक्रान्ता और लक्षमणा) सर्वोषधियों से;
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