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बृहत्संहिता • अध्याय 60 • श्लोक 3
श्वेता दिश्यपरस्यां वायव्यायां तु पाण्डुरा एव । चित्राश्चोत्तरपार्श्वे पीताः पूर्वोत्तरे कार्याः ॥
पश्चिम में सफेद, वायव्य कोण में पाण्डुर (कुछ सफेद), उत्तर में अनेक वर्ण वाली और ईशान कोण में पीली पुष्पमाला और पताका लगानी चाहिये।
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