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बृहत्संहिता • अध्याय 60 • श्लोक 20
उदगयने सितपक्षे शिशिरगभस्तौ च जीववर्गस्थे । लग्ने स्थिरे स्थिरांशे सौम्यैर्धीधर्मकेन्द्रगतैः ॥
उत्तरायण में, शुक्ल पक्ष में, चन्द्र और गुरु के षड्वर्ग में, स्थिर लग्न में, स्थिर नवांश में, शुभ ग्रह पञ्चम, नवम, लग्न, चतुर्थ, सप्तम और दशम स्थान में हों, पापग्रह तृतीय, षष्ठ, दशम और एकादश
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