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बृहत्संहिता • अध्याय 60 • श्लोक 19
विष्णोर्भागवतान् भगांश्च सवितुः शम्भोः सभस्मद्विजान् मातृणामपि मण्डलक्रमविदो विप्रान् विदुर्ब्रह्मणः । शाक्यान् सर्वहितस्य शान्तमनसो नग्नान् जिनानां विदु- चें यं देवमुपाश्रिताः स्वविधिना तैस्तस्य कार्या क्रिया ॥
विष्णु की प्रतिष्ठा वैष्णव, सूर्य की प्रतिष्ठा भगब्राह्मण, शिव की प्रतिष्ठा भस्म लगाने वाले ब्राह्मण, मातृकाओं की प्रतिष्ठा रण्डलक्रम जानने वाले ब्राह्मण, ब्रह्मा की प्रतिष्ठा ब्राह्मण, जितेन्द्रिय बुद्ध की प्रतिष्ठा रक्तपटधारी और जिन की प्रतिष्ठा दिगम्बर क्षपणक को करनी चाहिये। जो मनुष्य जिस देवता का परम उपासक हो, उसे उस देवता की क्रिया करनी चाहिये।
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