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बृहत्संहिता • अध्याय 60 • श्लोक 18
स्थापकदैवज्ञद्विजसभ्यस्थपतीन् विशेषतोऽभ्यर्च्य । कल्याणानां भागी भवतीह परत्र च स्वर्गी ॥
प्रतिष्ठा करने वाले मनुष्य को ज्यौतिषी, सभ्य मनुष्य, कारीगर- इन सबों का विशेष रूप से पूजन करना चाहिये। इस तरह करने वाला मनुष्य इस लोक में कल्याणों का भागी होता है और परलोक में स्वर्ग प्राप्त करता है।
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