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बृहत्संहिता • अध्याय 60 • श्लोक 17
बलिं प्रभूतं सम्पूज्य ब्राह्मणांश्च सभ्यांश्च । दत्त्वा हिरण्यशकलं विनिक्षिपेत् पिण्डिकाश्वने ॥
तत्पश्चात् वहाँ पर अनेक प्रकार की बलि देकर वस्त्र, दक्षिणा आदि से सभ्य जनों का पूजन करके, सोने का टुकड़ा देकर पिण्डिका के गड्ढे में प्रतिमा का स्थापन करना चाहिये।
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