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बृहत्संहिता • अध्याय 60 • श्लोक 13
धूमाकुलोऽपसव्यो मुहुर्मुहुर्विस्फुलिङ्गकृन्न शुभः । होतुः स्मृतिलोपो वा प्रसर्पणं चाशुभं प्रोक्तम् ॥
उसको ज्वाला वामावर्त क्रम से घूमती हो, बार- बार शब्द करती हो या उसमें चिनगारी उड़ती हो तो शुभ नहीं होता है तथा यदि हवन करने वाले की स्मृति का उस समय लोप हो जाय या प्रसर्पण हो जाय ( जहाँ पहले बैठा हो, वहाँ से सरक जाय तो भी शुभ नहीं होता है।
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