मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 60 • श्लोक 12
यो देवः संस्थाप्यस्तन्मन्त्रैश्चानलं द्विजो जुहुयात् । अग्निनिमित्तानि मया प्रोक्तानीन्द्रध्वजोत्थाने ॥
जिस देवता की प्रतिष्ठा हो रही हो, उस देवता के मन्त्रों से ब्राह्मण के द्वारा हवन कराना चाहिये। इन्द्रध्वजाध्याय में अग्नि के शुभाशुभ लक्षण हमारे द्वारा कहे गये हैं। यदि हवन के समय अग्नि धूमयुत हो,
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें