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बृहत्संहिता • अध्याय 60 • श्लोक 10
पूर्वशिरस्कां स्नातां सुवर्णरत्नाम्बुभिश्च ससुगन्यैः । नानातूर्यनिनादैः पुण्याहैर्वेदनिर्घोषैः ॥
पूर्व दिशा में शिर है जिसका, ऐसी प्रतिमा को स्नान करा कर सुगन्ध द्रव्य, अनेक प्रकार के तुरही आदि वाद्य, पुण्याहवाचन और वेदध्वनियों से पूजा करनी चाहिये।
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