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बृहत्संहिता • अध्याय 60 • श्लोक 1
दिशि याम्यायां कुर्यादधिवासनमण्डपं बुधः प्राग्वा । तोरणचतुष्टययुतं शस्तद्रुमपल्लवच्छन्नम् ॥
चार तोरणों से युत, प्रशस्त वृक्ष त के पत्रों से आच्छादित अधिवासन (संस्कारविशेष ) का मण्डप बनाना चाहिये।
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