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बृहत्संहिता • अध्याय 6 • श्लोक 11
प्राजापत्ये श्रवणे मूले त्रिषु चौत्तरेषु शाक्रे च । विचरन् घननिवहानामुपघातकरः क्षमातनयः ॥
यदि मंगल रोहिणी, श्रवण, मूल, उत्तरफाल्गुनी, उत्तरषाढ़ा, उत्तरभाद्र और ज्येष्ठ में गोचर करे तो जो घने बादल बने हैं उन्हें बिगाड़ देगा और वर्षा नहीं होगी।
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