लिङ्गं वा प्रतिमा वा दुमवत् स्थाप्या यथा दिशं यस्मात् । तस्माच्विह्नयितव्या दिशो द्रुमस्योर्ध्वमथवाधः ॥
वृक्ष की दिशाओं की तरह शिवलिङ्ग या प्रतिमा को स्थापित करना चाहिये तथा वृक्ष के ऊर्ध्व भाग से प्रतिमा का ऊर्ध्व भाग और वृक्ष के अधोभाग से प्रतिमा का अधोभाग बनाना चाहिये। अतः अभीष्ट वृक्ष को काटने से पहले ही उसमें सभी दिशाओं का चिह्न लगा देना चाहिये।
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