मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 59 • श्लोक 2
पितृवनमार्गसुरालयवल्मीकोद्यानतापसाश्रमजाः चैत्यसरित्सङ्गमसम्भवाश्च घटतोयसिक्ताश्च ॥
श्मशान के मार्ग, देवालय, वल्मीक, उपवन और तपस्वियों के आश्रम में उत्पन्न, चैत्य (प्रधान), नदियों के संगम-स्थान में उत्पन्न, घड़ों के जल से सिञ्चित,
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें