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बृहत्संहिता • अध्याय 59 • श्लोक 15
यन्त्रोक्तमस्मिन् वनसम्प्रवेशे निपातविच्छेदनवृक्षगर्भाः । इन्द्रध्वजे वास्तुनि च प्रदिष्टाः पूर्वं मया तेऽत्र तथैव योज्याः ॥
इस वनसम्प्रवेश नामक अध्याय में वृक्ष के निपात, विच्छेदन, वृक्षगर्भ आदि जो मैंने नहीं कहे हैं, उनको पूर्वकथित इन्द्रध्वजाध्याय और वास्तुविद्याध्याय में कथित ऐति की तरह समझना चाहिये ।
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