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बृहत्संहिता • अध्याय 59 • श्लोक 13
वृक्षं प्रभाते सलिलेन सिक्त्वा पूर्वोत्तरस्यां दिशि सन्निकृत्य । मध्वाज्यदिग्धेन कुठारकेण प्रदक्षिणं शेषमतो निहन्यात् ॥
इसके पश्चात् प्रातःकाल जल से वृक्ष को सींच कर शहद और घृत से चुपड़े हुए कुठार से पहले ईशान कोण में काट कर शेष को प्रदक्षिण क्रम से काटे।
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