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बृहत्संहिता • अध्याय 59 • श्लोक 12
यानीह भूतानि वसन्ति तानि बलिं गृहीत्वा विधिवत् प्रयुक्तम् । अन्यत्र वासं परिकल्पयन्तु क्षमन्तु तान्यद्य नमोऽस्तु तेभ्यः ॥
वे सब विधिपूर्वक इस पूजा को ग्रहण करके कहीं अन्यत्र अपना निवासस्थान कल्पित करें, आज वे सब मुझे क्षमा करें, उनको मैं नमस्कार करता हूँ।
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