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बृहत्संहिता • अध्याय 59 • श्लोक 11
अर्चार्थममुकस्य त्वं देवस्य परिकल्पितः । नमस्ते वृक्ष पूजेयं विधिवत् सम्प्रगृह्यताम् ॥
हे वृक्ष! अमुक देवता की पूजा के लिये कल्पित किये हुये आपको मैं नमस्कार करता हूँ, मेरे द्वारा की गई विधिपूर्वक इस पूजा को आप ग्रहण करें तथा इस वृक्ष पर जो प्राणी निवास करते हैं,
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