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बृहत्संहिता • अध्याय 59 • श्लोक 10
सुरपितृपिशाचराक्षसभुजगासुरगणविनायकाद्यानाम् । कृत्वा रात्रौ पूजां वृक्षं संस्पृश्य च ब्रूयात् ॥
पितर, पिशाच, राक्षस, नाग, सुरगण, गणेश आदि (भूत, प्रेत, सिद्ध, विद्याधर और गन्धर्व) की पूजा करने के पश्चात् वृक्ष को स्पर्श करके वक्ष्यमाण मन्त्र का पाठ करना चाहिये।
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