सुरपितृपिशाचराक्षसभुजगासुरगणविनायकाद्यानाम् । कृत्वा रात्रौ पूजां वृक्षं संस्पृश्य च ब्रूयात् ॥
पितर, पिशाच, राक्षस, नाग, सुरगण, गणेश आदि (भूत, प्रेत, सिद्ध, विद्याधर और गन्धर्व) की पूजा करने के पश्चात् वृक्ष को स्पर्श करके वक्ष्यमाण मन्त्र का पाठ करना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।