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बृहत्संहिता • अध्याय 59 • श्लोक 1
कर्तुरनुकूलदिवसे दैवज्ञविशोधिते शुभनिमित्ते । मङ्गलशकुनैः प्रास्थानिकैश्च वनसम्प्रवेशः स्यात् ॥
प्रतिमा बनाने वाले को चाहिये कि अनुकूल दिन में, दैवज्ञ के द्वारा विशोधित मुहूर्त में, यात्रा प्रकरण में विहित शुभ शकुन को देख कर प्रतिमा बनाने हेतु लकड़ी लाने के लिये वन में प्रवेश करे।
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