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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 6
अष्टाङ्गुलं ललाटं विस्ताराद् द्वयङ्गुलात् परे शङ्खौ । चतुरङ्गलौ तु शङ्खौ कर्णी तु इयङ्गुलौ पृथुलौ ॥
माथे की चौड़ाई आठ अंगुल, दोनों तरफ कनपटी की चौड़ाई दो-दो अंगुल और लम्बाई चार-चार अंगुल तथा दोनों कानों की चौड़ाई दो-दो अंगुल बनानी चाहिये ।
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