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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 54
चतुरस्रमवनिखाते मध्यं कार्यं तु पिण्डिकाश्वने । दृश्योच्छ्रायेण समा समन्ततः पिण्डिका श्वभ्रात् ॥
प्रतिमा के चतुरस्त्र भाग को भूमि में गाड़ना चाहिये, अष्टास्त्र भाग को पिण्डिका (जलहरी = जलघरी) के गड्ढे में रखना चाहिये और वर्तुल भाग को ऊपर रखना चाहिये। ऊपर के दृश्य वर्तुल भाग की ऊँचाई के तुल्य ही गड्ढे के चारो और पीठिका बनानी चाहिये।
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