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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 52
अन्यत्वमूर्ध्वदृष्ट्या करोति चिन्तामधोमुखी दृष्टिः । सर्वप्रतिमास्वेयं शुभाशुभं भास्करोक्तसमम् ॥
ऊपर की तरफ हो तो बनाने वाले को अन्धा और नीचे की तरफ हो तो बनाने वाले को चिन्तित करती है। सूर्य को प्रतिमा के सम्बन्ध में उक्त शुभाशुभ फल ही अन्य प्रतिमाओं के सम्बन्ध में भी जानना चाहिये।
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