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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 50
नृपभयमव्यङ्गायां हीनाङ्गायामकल्यता कर्तुः । शातोदर्या क्षुद्धयमर्थविनाशः कृशाङ्गायाम् ॥
अधिक अंग वाली प्रतिमा राजा से भय, हीनांग प्रतिमा बनाने वाले को रोगी, कृश उदर वाली प्रतिमा क्षुधा का भय और कुश अंग वाली प्रतिमा धन का नाश करती है।
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