नासाललाटचिबुकग्रीवाश्चतुराङ्गुलास्तथा कर्णौ । द्वे अङ्गुले च हनुनी चिबुकं च द्वयङ्गुलं विततम् ॥
प्रतिमा की नासिका, ललाट, ठोड़ी, गरदन और कान चार-चार अंगुल लम्बे तथा हनु और चिबुक (ठोड़ी) दो-दो अंगुल विस्तार वाला होना चाहिये।
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