मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 48
कमलोदरद्युतिमुखः कञ्चकगुप्तः स्मितप्रसन्नमुखः । रत्नोज्ज्वलप्रभामण्डलश्च कर्तुः शुभकरोऽर्कः ॥
कमली दर के समान मुखकान्ति, कञ्शुक से आच्छादित शरीर, ईषद हास्ययुक्त प्रसन्न मुख और रत्नों से दीप्यमानं कान्ति बनानी चाहिये। इस तरह बना हुआ सूर्य बनाने वाले के लिये शुभकारक होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें