कमली दर के समान मुखकान्ति, कञ्शुक से आच्छादित शरीर, ईषद हास्ययुक्त प्रसन्न मुख और रत्नों से दीप्यमानं कान्ति बनानी चाहिये। इस तरह बना
हुआ सूर्य बनाने वाले के लिये शुभकारक होता है।
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