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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 46
नासाललाटजङ्घोरुगण्डवक्षांसि चोन्नतानि रवेः । कुर्यादुदीच्यवेषं गूढं पादादुरो यावत् ॥
सूर्य की प्रतिमा के नासिका, ललाट, जड्डा, ऊरु, गाल और वक्षःस्थल ऊँचा, उत्तर देशवासियों की तरह वेष
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