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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 45
आजानुलम्बबाहुः श्रीवत्साङ्कः प्रशान्तमूर्तिश्च । दिग्वासास्तरुणो रूपवांश्च कायर्योऽर्हतां देवः ॥
जानु तक लम्बी भुजाओं से युत, श्रीवत्स-चिह्न से शोभित, शान्त, दिगम्बर, तरुण और सुन्दर जिन की प्रतिमा बनानी चाहिये।
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