मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 41
ब्रह्मा कमण्डलुकरश्चतुर्मुखः पङ्कजासनस्थश्च । स्कन्दः कुमाररूपः शक्तिधरो बर्हिकेतुश्च ॥
ब्रह्मा की मूर्ति के एक हाथ में कमण्डलु धारण कराकर उसको चार मुख वाला बनाना चाहिये और उसे कमलपुष्प के आसन पर बैठाना चाहिये। कार्तिकेय को बालक के स्वरूप का बनाना चाहिये एवं उनके हाथ में शक्ति (वीं) और मयूरयुक्त ध्वजा धारण कराना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें