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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 40
शाम्यश्च गदाहस्तः प्रद्युम्नश्चापभृत् सुरूपश्च । अनयोः स्त्रियौ च कार्ये खेटकनिखिंशधारिण्यौ ॥
शाम्ब की प्रतिमा को गदा और प्रद्युम्न की प्रतिमा को धनुष धारण कराना चाहिये। इन दोनों प्रतिमाओं को द्विभुज तथा सुन्दर बनाना चाहिये तथा इन दोनों के ही स्त्रियों की भी प्रतिमा बनानी चाहिये, जिनके हाथों में खेटक (फर) और खड्ग धारण कराना चाहिये।
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