प्रतिमा की ऊँचाई को बारह भाग करके फिर प्रत्येक भाग के नव-नव भाग करे। इस तरह एक-एक अंगुल का भाग बन जायगा; क्योंकि समस्त प्रतिमायें अपने-अपने अंगुलप्रमाण से १०८ अंगुल की होती हैं। अपने अंगुलप्रमाण से प्रतिमा का मुख बारह अंगुल चौड़ा और चौदह अंगुल लम्बा बनाना चाहिये। यह द्रविड देश का मान कहा गया है।
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