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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 39
वामेऽथाष्टभुजायाः कमण्डलुश्चापमम्युजं शास्त्रम् । वरशरदर्पणयुक्ताः सव्यभुजाः साक्षसूत्राश्च ॥
अष्टभुजा एकानंशा देवी की मूर्ति के बायें चार हाथों में क्रम से कमण्डलु, धनुष, कमल और पुस्तक तथा दाहिने चार हाथों में क्रम से वर देने वाली मुद्रा, बाण, दर्पण और अक्षसूत्र धारण कराना चाहिये।
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