मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 36
बलदेवो हलपाणिर्मदविभ्रमलोचनश्च कर्तव्यः । बिभ्रत् कुण्डलमेकं शङ्खन्दुमृणालगौरतनुः ॥
बलदेव की प्रतिमा के एक हाथ में हल धारण कराना चाहिये। मद से चलायमान नेत्र बनाना चाहिये। उसके एक कान में कुण्डल धारण कराना चाहिये तथा प्रतिमा को शंख, चन्द्र या मृणाल के समान सफेद वर्ण वाला बनाना चाहिये ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें