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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 35
द्विभुजस्य तु शान्तिकरो दक्षिणहस्तोऽपरश्च शङ्खधरः । एवं विष्णोः प्रतिमा कर्तव्या भूतिमिच्छद्धिः ॥
द्विभुज प्रतिमा बनानी हो तो दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और बाँये में शंख धारण की हुई पूर्ति बनानी चाहिये। ऐश्वर्य को चाहने वाले मनुष्य को इसी तरह विष्णु की प्रतिमा बनानी चाहिये।
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