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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 34
अथ च चतुर्भुजमिच्छति शान्तिद एको गदाधरश्चान्यः । दक्षिणपार्श्वे त्वेवं वामे शङ्खश्च चक्रं च ॥
चतुर्भुज विष्णु की प्रतिमा बनानी हो तो दाहिने तरफ के एक हाथ में अभय मुद्रायुत, दूसरे में गदा धारण की हुई, बाई तरफ के एक हाथ में शंख और दूसरे में चक्र धारण की हुई मूर्ति बनानी चाहिये।
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