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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 33
खड्गगदाशरपाणिर्दक्षिणतः शान्तिदश्चतुर्थकरः । वामकरेषु च कार्मुकखेटकचक्राणि शङ्खश्च ॥
खड्ग, गदा और शर धारण की हुई, चौथा हाथ अभय मुद्रा से युत, बाईं तरफ के चार हाथों से धनुष, ढाल, चक्र और शंख धारण की हुई अष्टभुज विष्णु की प्रतिमा बनानी चाहये।
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