कार्योऽष्टभुजो भगवांश्चतुर्भुजो द्विभुज एव वा विष्णुः । श्रीवत्साङ्कितवक्षाः कौस्तुभमणिभूषितोरस्कः ॥
विष्णु की प्रतिमा अष्टभुज, चतुर्भुज या द्विभुज बनानी चाहिये। उनके वक्षःस्थल को श्रीवत्सचिह्न और कौस्तुभ मणि से शोभित करना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।