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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 31
कार्योऽष्टभुजो भगवांश्चतुर्भुजो द्विभुज एव वा विष्णुः । श्रीवत्साङ्कितवक्षाः कौस्तुभमणिभूषितोरस्कः ॥
विष्णु की प्रतिमा अष्टभुज, चतुर्भुज या द्विभुज बनानी चाहिये। उनके वक्षःस्थल को श्रीवत्सचिह्न और कौस्तुभ मणि से शोभित करना चाहिये।
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