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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 29
देशानुरूपभूषणवेषालङ्कारमूर्तिभिः कार्या। प्रतिमा लक्षणयुक्ता सन्निहिता वृद्धिदा भवति ॥
प्रतिमा के भूषण, वेष, अलंकार और मूर्ति अपने-अपने देश के अनुरूप बनाने चाहिये; क्योंकि शुभ लक्षणों से युत प्रतिमा उसका निर्माण करने वाले की सदा उन्नति करती है।
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