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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 28
पर्वद्वयमङ्गुष्ठः शेषाङ्गुल्यस्त्रिभिस्त्रिभिः कार्याः । नखपरिमाणं कार्य सर्वासां पर्वणोऽर्धेन ॥
अंगूठे में दो पर्व एवं शेष चार अंगुलियों में तीन-तीन पर्व बनाने चाहिये तथा अपने-अपने पर्व के आधे के तुल्य नखों का परिमाण बनाना चाहिये ।
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