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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 22
अष्टौ तु जानुमध्ये वैपुल्यं त्र्यष्टकं तु परिणाहः । विपुलौ चतुर्दशोरू मध्ये द्विगुणश्च तत्परिधिः ॥
घुटने के मध्य भाग विस्तार आठ अंगुल, मोटाई चौबीस अंगुल और ऊरु के मध्य का विस्तार चौद अंगुल एवं परिधि अट्ठाईस अंगुल होती है।
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