मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 21
जङ्घाने परिणाह-श्चतुर्दशोक्तस्तु विस्तरात् पश्च । मध्ये तु सप्त विपुला परिणाहात् त्रिगुणिताः सप्त ॥
जाँघ के आगे के भाग की मोटाई चौदह अंगुल और विस्तार पाँच अंगुल तथा मध्य भाग का विस्तार आठ अंगुल और मोटाई इक्कीस अंगुल होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें