अष्ङ्गुष्ठनखः कथितश्चतुर्थभागोनमङ्गलं तज्ज्ञैः । शेषनखानामर्धाङ्गुलं क्रमात् किश्चिदूनं या ॥
प्रतिया के लक्षणों को जानने वालों ने अंगूठे के नख की लम्बाई पौन अंगुल और
शेष अंगुलियों की लम्बाई आधा अंगुल अथवा कुछ-कुछ कम करके बनाने का विधान
बताया है, जिससे कि प्रतिमा सुन्दर दिखाई दे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।