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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 2
परमाणुरजो बालाग्रलिक्षयूकं यवोऽङ्गुलं चेति । अष्टगुणानि यथोत्तरमङ्गुलमेकं भवति संख्या ॥
आठ परमाणु का रज, आठ रज का बालाग्र, आठ बालाग्र की लिक्षा, आठ लिक्षा का यूक, आठ यूक का यव और आठ यव का एक अंगुल होता है तथा एक अंगुल को संख्या होती है।
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