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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 19
अष्टांशाष्टांशोनाः शेषाङ्गुल्यः क्रमेण कर्तव्याः । सचतुर्थभागमङ्गुलमुत्सेोऽङ्गुष्ठकस्योक्तः ॥
प्रदेशिनी से अष्टांश-अष्टांश कम करके क्रम से शेष तीन अंगुलियाँ बनानी चाहिये। अंगूठे की ऊँचाई सया अंगुल और शेष अंगुलियों की ऊँचाई उसी के अनुपात से कुछ- कुछ कम करके बनानी चाहिये।
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