पर्यन्तात् पर्यन्तं दश ध्रुवोऽर्धाङ्गुलं ध्रुवोर्लेखा । भ्रूमध्यं क्यङ्गुलकं धूर्देध्येणाङ्गलचतुष्कम् ॥
एक भौं के अन्तभाग से दूसरे भौं के अन्तभाग तक दश अंगुल, भौं की चौड़ाई आधा अंगुल, भौ के मध्यभाग दो अंगुल
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