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बृहत्संहिता • अध्याय 58 • श्लोक 1
जालान्तरगे भानौ यदणुतरं दर्शनं रजो याति । तद्विन्द्यात् परमाणुं प्रथमं तद्धि प्रमाणानाम् ॥
जालान्तरगत सूर्यकिरण में जो धूलि दिखाई देती है, उसको 'परमाणु' जानना चाहिये। यह सब प्रमाणों में पहला प्रमाण होता है।
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