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बृहत्संहिता • अध्याय 57 • श्लोक 8
अष्टौ सीसकभागाः कांसस्य ड्रौ तु रीतिकाभागः । मयकथितों योगोऽयं विज्ञेयो वज्रसङ्घातः ॥
आठ भाग सीसा, दो भाग कांसा, एक भाग पीतल-इन सबको एक जगह गलाने से मयकथित 'वज्रसङ्घात' नामक चौथा लेप सिद्ध होता है।
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