गोमहिषाजविषाणैः खररोम्णा महिषचर्मगव्यैश्च । निम्बकपित्थरसैः सह वज्रतलो नाम कल्कोऽन्यः ॥
पूर्व में सिद्ध किये हुये काढ़े में गौ, भैंस, बकरा-इनका सींग; गदहे का बाल, भैंस का चमड़ा, गव्य (गोबर), नीम का फल, कैथ का फल, बोल-इन सबको पीसकर मिलाने पर पूर्वकथित गुणों से युत पूर्वोक्त कार्यों के लिये ही तीसरा लेप सिद्ध हो जाता है, इसका नाम 'वज्रवल' कहा गया है।
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