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बृहत्संहिता • अध्याय 57 • श्लोक 6
सर्जरसरसामलकानि चेति कल्कः कृतो द्वितीयोऽयम् । वज्राख्यः प्रथमगुणैरयमपि तेष्वेव कार्येषु ॥
बोल, आँवला- इन सबको पीस कर डाले तो प्रथम वज्रलेप के गुणों से युत पूर्वोक्त कामों के लिये ही एक दूसरा वज्रलेप तैयार हो जाता है।
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