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बृहत्संहिता • अध्याय 57 • श्लोक 4
प्रासादहर्म्यवलभीलिङ्गप्रतिमासु कुश्यकूपेषु । वर्षसहस्रायुतस्थायी ॥
गरम किये हुये वज्रलेप को देवप्रासाद, हवेली, वलभी, शिवलिङ्ग, देवप्रतिमा, भीत और कूप में यदि लगाया जाय तो यह एक करोड़ वर्ष तक नहीं छूटता है।
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